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उत्‍तर-पूर्व

किसी ने कहा है कि अगर वर्तमान का सदुपयोग कर लिया जाए तो भविष्‍य अपने आप सुखद हो जाएगा। युवा पीढी भी इसी वर्तमान की परिचायक है। भविष्‍य के सुखद और संपन्‍न होने के लिए युवा पीढी का स्‍वस्‍थ और सुकुशल होना जरूरी है। लेकिन ऐसा नहीं है।

आजकल अधिकांश युवा अपनी बेलगाम महत्‍वाकांक्षाओं के चलते या तो डिप्रेशन के शिकार हैं या फिर अग्रेशन यानी आक्रामकता के। इसे भले ही हम युवा पीढी की नादानी या नासमझी कहकर नजरअंदाज कर दें, लेकिन वास्‍तव में यह एक मानसिक विकृति है, जिसके चलते न सिर्फ युवा संगीन अपराध कर बैठते हैं, बल्कि आत्‍महत्‍या की ओर भी अग्रसर होते हैं।

आपको बता दें कि इस मानसिक स्थिति की एक बडी वजह वास्‍तु दोष भी है। अगर आपके घर का उत्‍तर-पूर्व यानी नॉर्थ-ईस्‍ट दोषपूर्ण तो आपके परिवार के युवा सदस्‍य इससे दुष्‍प्रभावित हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि नॉर्थ-ईस्‍ट में किन दोषों से बचे रहकर हम अपने परिवार के युवा सदस्‍य की मानसिक सेहत का खयाल रख सकते हैं।

  • नॉर्थ-ईस्‍ट यानी उत्‍तर-पूर्व को ईशान कोण भी कहा जाता है। ध्‍यान दें कि आपके घर का नॉर्थ-ईस्‍ट भाग कहीं कटा हुआ तो नहीं है। अगर ऐसा है तो यह निश्चित रूप से एक वास्‍तु दोष है, जिसका सीधा असर युवा सदस्‍यों की मानसिक क्षमता पर पडता है। वे डिप्रेशन या आत्‍मविश्‍वास की कमी और अवसाद की समस्‍या से घिर सकते हैं।
  • नॉर्थ-ईस्‍ट का कटा होना जितना दोषपूर्ण है, इसके फर्श यानी धरातल का घर के अन्‍य भाग से ऊंचा होना भी उतना ही दोषपूर्ण है। कोशिश करें कि फर्श का लैवल घर के अन्‍य भाग की तुलना में नॉर्थ-ईस्‍ट में थोडा नीचा रखें।
  • उत्‍तर-पूर्व यानी नॉर्थ-ईस्‍ट में टॉयलेट होना बीमारियों को आमंत्रित करता है। ऐसे भवन में युवा सदस्‍य तमाम तरह की शारीरिक व मानसिक बीमारियों से ग्रस्‍त पाए जा सकते हैं। ईशान कोण में बने टॉयलेट के साथ अगर युवाओं के निजी कक्ष या स्‍टडी अथवा कार्य करने के स्‍थल में भी वास्‍तु दोष है, तो बीमारी गंभीर रूप भी ले सकती है।
  • ईशान में सीढियां नहीं होनी चाहिएं। वास्‍तु के नियमानुसार ईशान कोण को हल्‍का, प्रकाशवान होना चाहिए। ईशान को ईश्‍वर का स्‍थान माना जाता है, इसलिए यहां पूजा स्‍थल बनाना आदर्श है, लेकिन यहां सीढियां भूलकर भी नहीं बनानी चाहिएं। नॉर्थ-ईस्‍ट में बनी सीढियां युवा सदस्‍यों की प्रगति में बाधक बनती हैं। नतीजतन वे डिप्रशन या अग्रेसन के शिकार होते हैं। ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जब नॉर्थ-ईस्‍ट में सीढियों के वास्‍तुदोष के कारण परिवार के किसी युवा सदस्‍य ने खुदकुशी कर ली।

उक्‍त वास्‍तुदोषों का निदान पिरामिड स्‍थापना या वास्‍तु के कुछ अन्‍य उपायों से किया जा सकता है, लेकिन बेहतर है कि किसी भी उपाय के लिए स्‍वप्रयोग करने के बजाए इस मामले में किसी कुशल वास्‍तु विशेषज्ञ की मदद ली जाए।

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