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ऐसे भी कर सकते हैं मिट्‌टी का परीक्षण

ऐसे भी कर सकते हैं मिट्‌टी का परीक्षण

प्राचीन वास्तुद्गाास्त्री किंग भोज ने मिट्‌टी के परीक्षण की दो तकनीकों का जिक्र किया है। इन तकनीकों के माध्यम से भी आप मिट्‌टी की अनुकूलता का पता लगा सकते हैं।

पहली विधि

मिट्‌टी परीक्षणः प्लॉट के मध्य में २ फुट गहरे, २ फुट लंबे और २ ही फुट चौड़ा एक गड्‌ढा बनाएं। गड्‌ढे को खोदी गयी मिट्‌टी से भर दें। यदि गड्‌ढा भरने के पद्गचात्‌ मिट्‌टी बच जाती है,तो वह प्लॉट अनुकूल है। खोदी गयी मिट्‌टी से गड्‌ढा पर्याप्त रूप से भर जाता है, तो वह भूमि औसत है। किंतु अगर खोदी गयी मिट्‌टी से गड्‌ढा पूरी तरह नहीं भर पाता है, तो ऐसी भूमि अनुकूल नहीं मानी जाती।

जल परीक्षणः इसी प्रकार दूसरा गड्‌ढा खोदें। यह गड्‌ढा भी २ फुट चौड ा, २ फुट लंबा और २ फुट गहरा हो। गड्‌ढे को ऊपर तक पानी से भर दें। जमीन को पानी सोखने में यदि एक घंटे से अधिक समय लगता है, तो वह भूमि अनुकूल है। वहीं पानी सोखने के बाद अगर गड्‌ढे में दरारें दिखाई देती हैं, तो ऐसी भूमि शुभ नहीं होती।

यह विधि आज भी अधिकांश वास्तुशास्त्री भवन निर्माण से पूर्व मिट्‌टी के परीक्षण के लिए अपनाते हैं।

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