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प्रेम उत्‍सव है वेलेंटाइन

प्रेम उत्‍सव है वेलेंटाइन

आप सबको मेरी ओर से वैरी हैप्‍पी वेलेंटाइन डे।

वेलेंटाइन आज की पीढी में इस कदर लोकप्रिय है कि इसके विरोधियों को भी विरोध छोडकर प्रेम के रंगों में रंगे देखा जा सकता है। मैं आप लोगों को बता दूं कि जिसे हम वेलेंटाइन डे के रूप में मनाते हैं और उसे पाश्‍चात्‍य संस्‍कृति की देन बताते हैं, असल में वह भारतीय संस्‍कृति का ही अटूट हिस्‍सा है।

गौर किजिएगा वेलेंटाइन डे यानी 14 फरवरी के आसपास ही आती है बसंत पंचमी यानी बसंत का आगमन। बसंत को प्रेम का वक्‍त माना गया है। यही वह समय होता है, जब पतझड रूख्‍सत लेती है और नए फुल-पत्‍तों के रूप में बसंत सृष्टि का नया श्रंगार करता है। चारों और नवसृजन का उत्‍सव होता है।

महान दार्शनिक वात्‍सयायन ने कामसूत्र में बसंत पंचमी को प्रेम के उत्‍सव का नाम दिया है। समूची प्रकृति के साथ नर व मादा भी सृष्टि के नव सृजन की भूमिका का निर्वाह करते हैं। बसंत के मौसम में मन में कोमल उमंगों को उठना स्‍वाभाविक होता है। मन वासनाओं के बहाव में बेलगाम न हो जाए, इस हेतु बसंत में पांच दिन पीले वस्‍त्र धारण कर दिन के समय मां सरस्‍वती की पूजा की जाती है, जिससे बुद्धि नियंत्रण में रहे और रात को नव-सृजन हेतु कामदेव का आह्वान किया जाता है। इसी से बसंत उत्‍सव सम्‍पूर्ण होता है।

आज की पीढी इसे वेलेंटाइन के रूप में मनाती है। वेलेंटाइन हो या बसंत उत्‍सव दोनों में फर्क नहीं है। दोनों के अंतर में है तो प्रेम ही निहित।

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