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रोमांस, सेक्स और वास्तु

आप में से ज्यादातर लोगों को शायद यह अजीब लगे। लेकिन यह सत्य है कि वास्तु जितना आपके निवासआपके रहन-सहनआपकी सेहतसंपन्नता से संबंधित हैउतना ही गहरा संबंध लवरोमांस और सेक्स से भी है। इस गंभीरमगर रोचक विषय पर आगे बढ़ने से पहले हमें प्यारसेक्स और रोमांस के अंतर को समझना जरूरी है।

बहुत सारे लोग आज भी प्यार और सेक्स के बारे में जिक्र करनाशर्मनाक समझते हैं। सबसे पहले तो यह जानना आवश्‍यक है कि मानव जीवन में प्यार और सेक्स उसी तरह आवश्यक हैंजिस तरह भोजन में नमक-मिर्च। अधिकांश लोग आज भी प्यार और सेक्स को एक ही समझते हैं यानी कि वे इन दोनों में कोई अंतर नहीं देखते। वास्तविकता यह नहीं है। प्यार और सेक्स में उतना ही बडा अंतर हैजितना दिन और रात में। एक-दूसरे से संबंधित होकर भी ये एक-दूजे से अलग हैं।

प्यार अगर आत्मा हैतो सेक्स शरीर है। बिना आत्मा के द्गारीर का कोई मतलब नहीं। सच्चे प्यार सरीखा दुनिया में दूसरा कुछ नहीं है। उसकी कोई कीमत नहीं है और न हो सकती है। पृथ्वी पर सच्चे प्यार का सबसे बडा उदाहरण है मां का बच्चे के प्रति प्रेम। निस्वार्थ और निर्झर प्रेम। ऐसा ही प्रेम पति-पत्नी और प्रेमी-प्रेमिका के बीच होता हैजहां दूसरे की खुशी के लिए वे बडे से बडा त्याग करने से भी नहीं चूकते।

इतिहास में सच्चे प्रेम के अनेक उदाहरण हैं। जैसे- लैला-मजनूंहीर-रांझासोनी-महिवालससी-पुन्नू। ये सारे प्रेमी इसलिए अमर हो गए क्योंकि इनमें एक-दूसरे के प्रति केवल शारीरिक भूख या आकर्शन नहींबल्कि आत्मीय प्रेम था।

रोमांस और प्रेम

प्रेम की पराकाष्ठा रोमांस है। रोमांस की खुशीइसके सम्पर्ण भाव और उत्तेजना का वर्णन करना आसान नहीं है। कह सकते हैं कि तमाम शारीरिक बंधनों और आकर्द्गानों से परे रोमांस एक अवर्णनीय सुखद अनुभूति है। राधा-कृद्गणसावित्री-सत्यवानशकुन्तला-दुष्यंत का संबंध प्यार की ऐसी ही पराकाष्‍ठा थी।

सेक्स

सेक्स की एक साधारण परिभाषा यह हो सकती है कि यह प्रकृति का ऐसा नियम हैजो सृष्टि के विकास के लिए बना है। नए जीवन की उत्पत्ति हेतु किया जाने वाला शारीरिक यज्ञ है-सेक्स। यह वह शक्ति हैजो विपरीत लिंगी को अपनी ओर आकर्षित करती है। हांइस आकषर्न या शक्ति की तुलना सच्चे प्यार से नहीं की जा सकती। किंतु यह भी उतना ही सत्य है कि सही प्रकार और सही उद्‌देष्य के लिए किया गया सेक्स सृष्टि के विकास या जीवन की उत्पत्ति जैसे लक्ष्यों से किसी प्रकार कम महत्वपूर्ण नहीं है।

बीते कई दशकों में स्थिति बदली है। सेक्स के नाम पर पहले जुबान पर ताला लग जाता था। लेकिन बीते चंद दशकों में इस विषय पर खुलकर चर्चा की जाने लगी है। बावजूद इसके यह सच अपनी जगह है कि ज्यादातर लोग सेक्स के बारे में भ्रांतियां पाले हुए हैं। वे प्यार और सेक्स को एक-दूसरे का पर्यायवाची समझ बैठते हैं और ऐसा करके वे जीवन की इन दोनों महान ऊर्जा शक्तियों के साथ अन्याय करते हैं।

सेक्स और अश्लीलता

सेक्स से जुड़ी एक सबसे बडी भ्रांति यह है कि सेक्स से जुडी किसी भी बात को लोग अश्‍लील समझते हैं। जबकि ऐसा नहीं है। इन दिनों मीडियाविशेषकर ज्यादातर टीवी चैनलों और फिल्मों के माध्यम से इंटरटेनमेंट के नाम पर जो कुछ परोसा जा रहा हैवह जरूर अशलीलता है। लेकिन इसकी फिक्र किसे है! मीडिया को तो मतलब है अपने लाभ से। समाज पर उसका क्या असर होता हैउसकी बला से! यह अश्लीलता ही सोसायटी में बड  रहे यौन अपराधों की एक अहम वजह है। एक दंपती के बीच स्वस्थ शारीरिक संबंध सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित करते हैंवहीं अश्लीलता समाज को नकारात्मक ऊर्जा देती है।

पति-पत्नी के बीच स्वस्थ सेक्स संबंधों का उद्‌देष्य महज एक नए जीवन की उत्पत्ति नहींबल्कि इससे भी कहीं महान हो सकता है। इससे जुडा एक आश्चर्यजनक सत्य यह है कि सेक्स आध्यात्मिक विकास में मदद करता है। सेक्स और अध्यात्म का क्या रिश्‍ता। आपमें से अधिकांश  लोगों के मन में शायद यही प्रश्न उठ रहा होगा। लेकिन यही सत्य है। महान दार्शनिक ओशो ने अपनी पुस्तक संभोग से समाधि की ओर‘ में इस विषय पर विस्तृत वर्णन किया है।

संभोग से कुंडलिनी जागरण

पति-पत्नी के बीच सही स्थानसही समय और सही उद्‌देष्य से किया जाने वाला संभोग मानव द्गारीर में वास करने वाली अद्‌भुत आध्यात्मिक द्गाक्ति- कुंडलिनी‘ को जाग्रत करने की क्षमता रखता है। जाहिर है कि आपमें से बहुत से लोग ऐसे भी होंगे जो कुडलिनी के बारे में नहीं जानते होंगे। कुंडलिनी मानव द्गारीर में छुपी वह अद्‌भुत द्गाक्ति हैजिसका स्थान रीड की हड्‌डी के आधार क्षेत्र में मानव जननांगों के नजदीक होता है। साधारण व्यक्तियों के लिए कुडलिनी सोए हुए सर्प की भांति है। कुंडलिनी जागरण होने पर मानव असाधारण और चमत्कृत कर देने वाली द्गाक्तियों का स्वामी बन जाता हैं। दंपती के बीच किया जाने वाला स्वस्थ संभोग अगर पूर्णतः नहींतो कुछ हद तक कुडलिनी जाग्रत कर सकता है।   

अब यह समझना मुश्किल नहीं कि सेक्स का एक गृहस्थ के जीवन में क्या महत्व होता है। आप अगर अपने सेक्स जीवन को आत्मिक और अति-सुखद बनाना चाहते हैंतो वास्तु दिशा-निर्देश इसमें आपकी मदद कर सकते हैं। आइएजानते हैं कि वास्तु नियमों को अपनाकर हम अपना सेक्स जीवन कैसे सुखद बना सकते हैं-

ह्ण     एक शादीशुदा युगल के लिए उनका शयन कक्ष ऐसा स्थान होता हैजहां वे न आत्मीय पल बीताते हैंसंभोग का आनंद भी लेते हैं। वास्तु के अनुसारविवाहित जोड़े का शयन कक्ष दक्षिण अथवा दक्षिण-पश्चिम में होना चाहिए। इससे उनके बीच स्थायी संबंध कायम होता है।

ह्ण     दक्षिण-पूर्व में बना द्गायन कक्ष सेक्स संबंधों को उत्तेजक और संतोंशप्रद बना देता है। पर चूंकि इस दिशा के प्रतिनिधि देव अग्नि देव हैंइसलिए पति-पत्नी के बीच हुई छोटी-सी नोक-झोंक भी उनके संबंधों को बिगाड  सकती है। इसलिए आपका शयन कक्ष अगर दक्षिण-पूर्व में हैतो नोक-झोंक से बचना चाहिए। जितना संभव हो सकेएक-दूसरे के साथ विनम्र बने रहें। इसका एक वैकल्पिक उपाय यह हो सकता है कि आप इस कक्ष को संभोग के लिए इस्तेमाल करें और शयन किसी अन्य कक्ष में करें।

ह्ण     नवदंपती यानी नए शादीशुदा जोड़े का बेड रूम उत्तर-पश्चिम दिशा में बनाया जा सकता है। यह दिशा वायु देवता की है। इस दिशा में बना शयन कक्ष नव युगल के बीच उत्पन्न होने वाली कामअग्न को हवा देगा यानी उनके संबंधों को और उत्तेजक व सुखमय बना देगा। लेकिन यह ध्यान रखें कि युगल इस दिशा में बने द्गायन कक्ष को थोडे समय के लिए ही इस्तेमाल करेंक्योंकि यह दिशा अस्थिरता की दिशा है। लंबे समय तक इस शयन कक्ष का प्रयोग किया जाना उनके संबंध में अस्थिरता पैदा कर सकता है।

ह्ण     शयन कक्ष को रखें आकर्द्गाक और सुस्सजित। दंपती का कमरा साफ-स्वच्छ व इस प्रकार सुस्सजित होना चाहिए कि उन्हें वहां आते ही सुकून व आरामदायक महसूस हो। कमरे में आपके व्यापार या ऑफिस वर्क से जुड़ा कोई भी सामान जैसे कम्प्युटर या फाइलें आदि नहीं होने चाहिएं। ये चीजें आपकी एकाग्रता को बाधित करती हैं।

ह्ण     बेड को कक्ष के दरवाजे के सामने नहीं लगाना चाहिए। किंतु आपके बेड की पॉजिशन ऐसी होनी चाहिए कि वहां से दरवाजा दिखाई दे। कोशिश करें कि अपने डबल बेड के लिए सिंगल दो गद्‌दों का नहींबल्कि एक ही बडे गद्‌दे का प्रयोग करें। माना जाता है कि डबल गद्‌दे दंपती के बीच अलगाव और दूरियों का कारण बन सकते हैं।

ह्ण     आजकल यह प्रचलन हो गया है कि युगल अपने बेड के समक्ष बडा-सा शीशा लगाने लगे हैंजिससे वे सेक्स संबंध बनाते समय खुद को शीशों में संभोगरत देख सकें। ऐसा नहीं करना चाहिए। द्गायन कक्ष में शीशा नहीं लगाना चाहिएखासकर बेड के सामने तो बिल्कुल भी नहीं।

ह्ण     कुछ लोग बेडरूम के ही कोने में पूजा-स्थल बना लेते हैं। ऐसा करने से बचना चाहिए। अगर यह संभव न हो तो पूजा-स्थल व बेड के बीच लकडी या धातु का पार्टिशन लगाकर उसे अलग कर दें।

ह्ण     बेड रूम में देवी-देवताओं या परिजनों के चित्र नहीं लगाने चाहिएं। इनके स्थान पर प्रेमी युगल या प्रेम व रोमांस को प्रकट करने वाली तस्वीरें दीवारों पर लगाएं। शयन कक्ष में ताजा व खुशबूदार फूलों को रखें।

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