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वास्‍तु के शुभ प्रतीक घर को बनाएं समृद्ध

आपके आवास को सुख, स्‍वास्‍थ्‍य, समृद्धि प्रदाता बनाने और निर्माण में हुए वास्‍तु दोषों का प्रभाव कम करने के लिए शुभ प्रतीकों का भी जिक्र आता है। आज हम ऐसे ही कुछ शुभ प्रतीकों की चर्चा कर रहे हैं, जिनका उपयोग स्‍वास्‍थ्‍य और सौभाग्‍य प्राप्ति के लिए अनादि काल से किया जाता रहा है।

वास्‍तु के ये शुभ प्रतीक हैं- 1. ओम, 2. स्‍वास्तिक, 3. मंगल कलश, 4. पंचसूलक (पांच तत्‍वों की प्रतीक खुली हथेली की छाप), और 5. मीन।

  1. ओम: यह मान्‍यता है कि ओम सृष्टि के रचनाकार ब्रह्मा का प्रतीक है। संपूण्र ब्रह्मांड इस शब्‍द में समाया है। इस पवित्र शब्‍द का आस्‍था के साथ उच्‍चारण करने से न सिर्फ मन में शांति का संचरण होता है, वरण कई मानसिक रोगों में भी यह चमत्‍कारी औषद्यी का कार्य करता है। इस पवित्र प्रतीक को किसी भी परिसर में उत्‍कीर्ण करने मात्र से दिव्‍य आशीषों की प्राप्ति होती है।
  2. स्‍वास्तिक: इस अत्‍यंत पावन प्रतीक का प्रयोग प्राचीन काल से ही होता आ रहा है। परिसर में किसी भी प्रकार का वास्‍तु दोष होने की स्थिति में मुख्‍य द्वार के दोनों ओर एक-एक स्‍वास्तिक पिरामिड रखने से लाभ होता है। बही और तिजोरी पर स्‍वास्तिक का चिह्न बना देने से व्‍यापार में बढोतरी होती और खुशहाली आती है।
  3. मंगल कलश: मंगल कलश भी भारतीय परंपरा का एक अनिवार्य अंग है, जिसमें शुभ प्रतीकों के माध्‍यम से सौभाग्‍य को आमंत्रित किया जाता है। यह मिट्टी का पात्र होता है, जिसमें शुद्ध जल भरा होता है। यह आम या अशे की पत्तियों और मौली (पवित्र लाला धागा) आदि से सज्जित होता है, और इसकी पूजा की जाती है। मान्‍यता है कि मंगल कलश को स्‍वास्‍थ्‍य, समृद्धि और कल्‍याण का सूचक माना जाता है। सभी शुभ संसकारों में इसकी उपस्थिति अनिवार्य होती है।

          नए घर में जाने से (गृह प्रवेश) के समय इसकी महत्‍वपूर्ण और सार्थक भूमिका होती है, और इसे               अत्‍यंत शुभ माना जाता है।

     4.  पंचसूलक: यह खुली हथेली की छाप होती है, जो पांच तत्‍वों की प्रतीक है। हमारे आस-पास जो               कुछ है वह, और हमारे शरीर भी इन पांच तत्‍वों से बने हैं। इससे सौभाग्‍य के लिए इस प्रतीक के               इस्‍तेमाल का महत्‍व स्‍पष्‍ट होता है। जैन धर्म में इसे बेहद अहमियत दी गई है।

         हिंदू लोग गृह प्रवेश जन्‍म संस्‍कार और विवाह आदि के अवसरों पर हल्‍दी-सनी हथेली छापते हैं।

         मुख्‍य प्रवेश द्वार पर लगी पंचसूलक की छाप समृद्धि, सख, और शुभता लाती है।

    5.  मीन : प्राचीन काल से ही, मीन (मछली) का संबंध खुशहाली से जोड़ा जाता रहा है। मछली के जोड़े           का प्रतीक प्रेम को बढ़ाता है। उत्‍तर दिशा में मछली का प्रतीक या प्रतिमा रखने से धन बढ़ता है।             बताई गई दिशा में मछलीघर (फिश एक्‍वेरियम) रखने से सौभाग्‍य की स्थिति बनती है। घर से               निकलने से पहले, मछली के दर्शन करना शुभ माना जाता है। अगर मछली घर में कोई मछली                 स्‍वाभाविक मृत्‍यु को प्राप्‍त होती है तो कहते हेा कि यह अपने साथ उस स्‍थान की नकारात्‍मक                 ऊर्जा लेकर चली जाती है। कुछ लोगों का ऐसा भी मानना है कि एक्‍वेरियम में मछली की मौत                 होना घर से किसी सदस्‍य की लम्‍बी बीमारी के जाने का सूचक है।

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