Feng Shui

बाथरूम भी हो फेंग्‍शुई सम्मत

भले ही बाथरूम में हम अधिक समय व्यतीत न करते हों, लेकिन यह हमारे निजी इस्तेमाल का बेहद खास स्थान होता है। जीवन में सकारात्मक परिणामों के लिए आवश्यक है कि हमारे स्नानघर की दिशा व दशा उचित हो। फेंग्‍शुई बाथरूम को विद्गोद्गा अहमियत प्रदान करता है, क्योंकि यहां हम अपने शारीरिक विकारों के साथ-साथ हम अपने भावनात्मक विकारों (मैल) की भी सफाई करते हैं। फेंग्‍शुई के अनुसार, बाथरूम घर में उत्तर दिद्गाा में स्थित होना चाहिए। बाथरूम को घर के मध्य भाग में न बनाएं। इससे परिवार के सदस्यों को शारीरिक परेशानियों, बीमारी आदी से गुजरना पड़ सकता है। बाथरूम घर के मुखय द्वार से दिखाई न दे। इसे बेडरूम व रसोईघर के सामने भी बनाने से बचना चाहिए। बाथरूम व रसोई अथवा बेडरूम की दीवार से न जुडा हो। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। बाथरूम का प्रतिनिधि तत्व जल है। बाथरूम की दीवारों पर हमेशा पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करने वाले भूरा या पीला रंग करवाने चाहिएं। जिस प्रकार पृथ्वी जल को सोख लेती है, उसी प्रकार ये रंग भी बाथरूम में अतिरिक्त जल को सोखकर वहां ऊर्जा का प्रवाह संतुलित करते हैं।  बाथरूम में खिड की दरवाजे के ठीक सामने न बनी हो। बाथटब, शौचालय के पॉट में भी कुछ दूरी होनी चाहिए। इसके साथ ही बाथरूम में हवा व रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था हो। फेंग्‍शुई कहता है कि बाथरूम की दीवार पर शीशे लगाने से घर में ‘ची‘ यानी ऊर्जा का प्रवाह होता है, लेकिन ध्यान रहे कि शीशे एक-दूसरे के सामने न लगे हों। बाथरूम अगर घर के मुखय प्रवेश द्वार के सामने बना हो तो करियर के अवसर प्राप्त होने से पहले ही छिन जाते हैं। बाथरूम अगर घर के मध्य भाग में बना हो, तो उसके बाहरी हिस्से की दीवार पर शीशा लगाएं व बाथरूम की दीवार पर लाल रंग करवाएं। इसके साथ ही पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करने वाला सामान जैसे मिट्‌टी का गमला, क्रिस्टल अथवा स्टोन बाथरूम के कोनों में रखें। बाथरूम में अगर खिड़की न बनी हो, तो वहां ताजगी व वायु तत्व के लिए आप छोटे पौधे का गमला रख सकते हैं। गमले को सौर प्रकाश व ताजा हवा देने के लिए आप उसे नियमित समय के […]

ऐसा हो आपका फेंग्‍शुई बेडरूम

घर महज सिर छुपाने की जगह नहीं, हर आम-ओ-खास आदमी का सपना होता है। घर के चयन से लेकर उसमें प्रवेश करने तक हम न जाने क्या-क्या विधान और पूजा-पाठ करते हैं। यह सब इसलिए ताकि हमारा घर हमारे लिए आदर्द्गा आवास बन जाए, जहां खुशियां और समृद्धि का हर पल वास हो। फेंग्‍शुई कहता है कि घर के चयन में आपको तीन बातों का विशेष खयाल रखना चाहिए। पहली- घर की दिशा व लोकेशन। दूसरी, घर में रसोईघर का स्थान और तीसरी है- बेडरूम। बेडरूम अर्थात शयन कक्ष हमारे घर का ही नहीं, जीवन का भी अहम्‌ स्थान होता है। यही वह स्थान होता है, जहां हम प्रतिदिन की थकान उतारते हैं और गहरी आरामदायक निद्रा के बाद नयी सुबह में नए जीवन के लिए तैयार होते हैं। बेडरूम में ही हम अपने जीवनसाथी के साथ अंतरंग व यादगार लम्हे बिताते हैं। इतना ही नहीं, शयन कक्ष में ही हम अपने दिनभर के अच्छे-बुरे कार्यों पर चिन्तन-मनन भी करते हैं। अपनी गलतियों के लिए पद्गचाताप्‌ करते हैं, तो सकारात्मक कार्यों से स्वयं को नयी सफलता के लिए स्वप्रेरित करते हैं। ह्ण     फेंग्‍शुई कहता है कि हमारा शयन कक्ष अगर उपयुक्त है तो वह हमें सोते समय भी सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है, जबकि हमारे नकारात्मक विचारों का शमन करता है। हमेशा अपनी निजी शुभ दिशा की ओर सिर करके शयन करें। अपनी निजी शुभ दिशा आप कुआ नंबर के माध्यम से जान सकते हैं। फेंग्‍शुई के एक अन्य अध्याय में इसका विस्तृत वर्णन किया गया है। ह्ण     कक्ष में अगर शीशा लगा है तो शयन के दौरान सिर शीशों की ओर नहीं होना चाहिए। शीशा अग्नि तत्व का प्रतिरोधक है। अग्नि तत्व के प्रभाव को कम कर देता है, जिसका सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ता है। शयन कक्ष से जल तत्व को भी दूर रखें। कोशिश करें कि पानी से संबंधित कोई पेंटिग या टेलीविजन भी शयन कक्ष में न हो। ह्ण     शौचालय अथवा जहां वाशिंग मशीन रखी हो, शयन के दौरान उस तरफ सिर न करें। ऐसा करने से बेचैनी व तनाव रहता है। ह्ण     छत में लगे लोहे के बीम के नीचे शयन न करें। यह सिरदर्द और चिड़चिडेपन का कारण बन सकता है। यही नहीं, इससे आपसी संबंधों में भी तनाव […]

फेंग्‍शुई क्रिस्टल है लाजवाब

वास्तु की भांति फेंग्‍शुई भी प्राकृतिक तत्वों के साथ संतुलन बनाने पर आधारित है। फेंग्‍शुई के पांच तत्व हैं- पृथ्वी, अग्नि, जल, धातु और लकड़ी। पृथ्वी तत्व प्यार, रोमांस और साझेदारी यानी मैत्री संबंधों का प्रतीक है। पृथ्वी तत्व मादा एनर्जी को भी प्रभावित करता है, जिसका सीधा संबंध परिवार की प्रमुख स्त्री सदस्या से है। इसी पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करता है क्रिस्टल। घर के मुखय द्वार या किसी भी कक्ष के प्रवेश द्वार के सामने दायीं ओर क्रिस्टल लगाकर आप उपर्युक्त क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम पा सकते हैं। पृथ्वी तत्व को प्रभावी बनाकर आप धातु तत्व को भी ऊर्जावान बना सकते हैं। घर या कक्ष के प्रवेश द्वार पर खडे होकर अंदर की ओर दाहिनी दिशा में मध्य भाग में क्रिस्टल स्थापित करना चाहिए। यह स्थान धातु तत्व का होता है। धातु तत्व रचनात्मकता, अवसरों और बच्चों से संबंधित होता है। इस दिशा में लगाए गए क्रिस्टल आपकी रचनात्मकता बढाने के साथ-साथ सुअवसरों में वृद्धि करते हैं। क्रिस्टल से जुडा दिलचस्प पहलू यह है कि यह भिन्न-भिन्न दिशाओं में भिन्न-भिन्न प्रभाव देता है। जैसे कि क्रिस्टल को अगर दरवाजे के निकट स्थापित किया जाए तो यह आपके उन्नति की रफ्‌तार धीमी कर देता है। दरवाजे का मध्य भाग परिवार के मंझले बेटे का भी होता है। इस स्थान पर क्रिस्टल की स्थापना करके आप अपने पुत्र को आज्ञाकारी बना सकते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो यह संतान को नियंत्रण में रखने का कार्य करता है। कौन से रंग का क्रिस्टल इस्तेमाल करें, क्रिस्टल का चयन करने में उसका आकार ही नहीं, रंग भी मायने रखता है। अगर आपके जीवन में रोमांस की कमी है, तो पिंक यानी गुलाबी अथवा पर्पल (बैंगनी) रंग के क्रिस्टल को स्थापित करें। इसी प्रकार रचनात्मक क्षमता के विकास के लिए सफेद रंग का क्रिस्टल स्थापित करना चाहिए। क्रिस्टल बॉल क्रिस्टल बॉल क्रिस्टल का बहुमुखी गोला होता है, जिसे ऊपरी मध्य भाग से धागे अथवा प्लास्टिक तार की सहायता से लटकाया जाता है। क्रिस्टल बॉल आजकल खासी प्रचलित है। यह गैजेट नकारात्मक ऊर्जा का प्रतिरोधक है तो सकारात्मक ऊर्जा का उतना ही अच्छा प्रवाहक होता है। लंबे व संकरे गलियारे के मध्य भाग में क्रिस्टल बॉल लटकाकर आप वहां उपस्थित नकारात्मक ऊर्जा […]

फेंग्‍शुई से बनाएं अपना रसोईघर

रसोईघर किसी भी घर का महत्वपूर्ण स्थान होता है। यही वह जगह होती है, जहां गृहणी अपना अधिकांश समय व्यतीत करती है और अपने परिवार के लिए प्यार भरा पौष्टिक भोजन बनाती है। फेंग्‍शुई के अनुसार, दक्षिण व पूर्व दिशा रसोईघर के लिए सर्वोचित होती हैं। ये दोनों दिशाएं क्रमश:  प्रकाश व वायु का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन दिशाओं का तत्व लकड़ी है, जो कि अग्नि का सहयोगी तत्व माना जाता है। इसमें संशय नहीं कि रसोईघर में भोजन बिना अग्नि प्रज्ज्वलित किए नहीं बनाया जा सकता। लकडी तत्व इस कार्य में सहायक भूमिका का निर्वाह करता है। रसोईघर अगर भवन के मध्य भाग में बनाया जाता है, तो वह गृहस्वामी के लिए विभिन्न समस्याओं का सबब बन जाता है। परिवार के अन्य सदस्यों को भी निराशा और मोटापे जैसे बीमारियों का शिकार होते देखा जा सकता है। रसोईघर भवन के प्रवेश द्वार के सामने नहीं होना चाहिए। फेंग्‍शुई कहता है कि रसोईघर की दीवारों का रंग सफेद होना चाहिए। सफेद रंग स्वच्छता व पवित्रता का प्रतीक है। धातु तत्व का प्रतीक है सफेद रंग, जो रसोईघर में अग्नि तत्व की मजबूत स्थिति के सहयोगी का कार्य करता है। रसोईघर की दीवारों पर कभी भी लाल रंग जो कि अग्नि तत्व का प्रतीक है या काला/गहरा नीला रंग, जो जल तत्व के प्रतीक हैं,  नहीं करने चाहिएं। न ही रसोईघर की दीवारों पर हरा रंग इस्तेमाल करें, जो कि लकडी तत्व का प्रतीक है। रसोईघर के लिए सबसे उपयुक्त रंग हल्का पीला अथवा क्रीम है। यह रंग पाचन शक्ति को बेहतर रखता है। रसोईघर कभी भी सीढि यों के नीचे न बनाएं। घर के इस खास हिस्से को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए क्राइसोप्रस क्रिस्टल लगाए जा सकते हैं। चूंकि रसोईघर खाना बनाने से लेकर खाना खाने, साफ-सफाई करने और कभी-कभी गृहणी के लिए सुस्ताने का स्थान भी होता है, लिहाजा इसके लिए सही स्थान का चयन करना वाकई कठिन कार्य है। लेकिन फेंग्‍शुई उपायों को अपनाकर इस कठिन कार्य को आसान किया जा सकता है। जानिए फेंग्‍शुई रसोईघर के लिए कुछ खास बातें :- ह्ण     रसोईघर में हवा व प्रकाश के उचित प्रबंध के लिए वेंटिलेशन की व्यवस्था हो। ह्ण     खाना बनाने के लिए चूल्हा, बर्तन साफ करने का सिंक और रेफ्रिजरेटर रसोईघर […]

शिक्षा के लिए भी है लाभकारी फेंग्‍शुई

शिक्षा जीवन के सुखद सपनों का आधार है। हमारी शिक्षा ही हमारे करियर की दिशा निर्धारित करती है, जिस पर हमारे जीवन की तमाम खुद्गिायां निर्भर करती हैं। यह सच है कि फेंग्‍शुई या ऐसी कोई भी विद्या आलसी छात्रों की मदद नहीं कर सकती, लेकिन औसत, मगर मेहनती छात्रों को जरूर वांछित परिणाम प्राप्त करा सकती है। आप भी अगर अपने शैक्षणिक जीवन में असाधारण सफलता अर्जित करना चाहते हैं, तो फेंग्‍शुई के निम्न उपायों को अपनाएं:-     कुआ नंबर की सहायता से अपनी ४ निजी शुभ दिशाओं को जानिए। निजी शुभ दिशाएं आपके करियर, शयन की स्थिति, आपसी संबंधों और आर्थिक सफलता से संबंध रखती हैं। व्यक्तिगत शुभ दिशा जानने की विधि वेबसाइट के दूसरे लेख में दी गयी है।      घर में जो बच्चे शिक्षा कर रहे हैं, उनके लिए व्यक्तिगत शुभ दिशा जानकर,  जो दिशा शिक्षा के लिए सर्वोत्म हो उनकी स्टडी टेबल उसी दिशा में रखें, जिससे पढ़ाई करने के दौरान उनका मुख उस दिशा की ओर है। यही नहीं, उन्हें शयन के दौरान सिर भी इसी दिशा में रखना चाहिए।     स्टडी टेबल की तरफ किसी नुकीली वस्तु का मुख नहीं होना चाहिए। यह न सिर्फ असहजता और शारीरिक परेशानी का कारण बनता है, पढाई में एकाग्रता को भी भंग करता है।      बच्चों का द्गायन या अध्ययन कक्ष गैराज के ऊपर न बनाएं। अध्ययन कक्ष रसोइघर व शौचालय के ऊपर या नीचे भी नहीं बनाना चाहिए।      उत्तर-पूर्व दिशा शिक्षा अर्थात ज्ञान की दिशा है। इस दिशा को अधिक ऊर्जावान बनाने के लिए पृथ्वी तत्व से संबंधित वस्तुएं जैसे मिट्‌टी के बने शो- पीस आदी दीवार पर लगाएं।      मेहनत और धैर्य कभी व्यर्थ नहीं जाते। अगर आप लगन व मेहनत से अध्ययन करते हैं, तो उसका अपेक्षित परिणाम आपको अवश्‍य मिलेगा।

करियर संवारे फेंग्‍शुई सेट

फेंग्‍शुई नियमों को अपनाकर आप न सिर्फ स्वस्थ रह सकते हैं और आपसी संबंधों को मधुर बना सकते है, बल्कि अपने करियर में सफलता भी प्राप्त कर सकते हैं।      कुआ नंबर की सहायता से अपनी ४ निजी शुभ दिशाओं को जानिए। निजी शुभ दिशाएं आपके करियर, शयन की स्थिति,  आपसी संबंधों और आर्थिक सफलता से संबंध रखती हैं। व्यक्तिगत शुभ दिशा जानने की विधि वेबसाइट के दूसरे लेख में दी गयी है।      अगर आपको लगता है कि आप करियर में सफलता नहीं पा रहे हैं या अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है, तो घर के मुखय द्वार को अपने करियर के लिए व्यक्तिगत शुभ दिशा की ओर स्थानांतरित कर दें।     अगर कार्यालय (ऑफिस) के स्वामी आप स्वयं हैं तो अपनी टेबल केबिन के दरवाजे के ठीक सामने न लगाएं।      इस बात का विशेष खयाल रखें कि आपकी ऑफिस चेयर के पीछे खिड़की-दरवाजा इत्यादि न होकर दीवार हो। कुर्सी के पीछे अस्थायी आधार जैसे खिड की या दरवाजा होने का तात्पर्य है आपके कार्यक्षेत्र मे सहयोग का अभाव। यही नहीं, आपके कर्मचारी या सहकर्मी आपके साथ धोखा कर सकते हैं।      अपनी कुर्सी के पीछे दीवार पर पर्वत श्रंखलाओं वाली पेंटिंग लगाएं। लेकिन इस बात का खयाल रखें कि पेंटिंग में जल तत्व यानी पानी का दृष्य न हो।      अगर आपके कार्यस्थल में स्तंभ (पिल्लर) बने हैं, तो नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह कम करने के लिए आप स्तंभों के साथ पौधों के गमले रख सकते हैं। इस दोष का उपाय क्रिस्टल लगाकर एवं उक्त क्षेत्र को अधिक प्रकाशमान करने से भी किया जा सकता है।      फेंग्‍शुई के अनुसार, उत्तर दिशा करियर की दिशा है। इस दिशा का तत्व जल है एवं रंग नीला है। करियर में बेहतर परिणाम पाने के लिए घर या कार्यस्थल पर उत्तर दिशा में मेटल विंड चाइम (धातु की पवन घंटियां) लगाएं।

फेंग्‍शुई रखे सेहत का खयाल

कहते हैं कि स्वस्थ शरीर मे ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है। स्वस्थ शरीर और मस्तिष्क से बड़ी दौलत दुनिया में दूसरी नहीं। दुनिया की सारी दौलत खर्च करके भी अच्छा स्वास्थय नहीं पाया जा सकता, लेकिन एक स्वस्थ व्यक्ति चाहे तो अपनी मेहनत के बलबूते पर दौलत का अंबार लगा सकता है। हालांकि आधुनिक चिकित्सा पद्धती से मनुद्गय ने बहुत हद तक बीमारियों पर विजय हांसिल कर ली है। लेकिन आप चाहें तो फेंग्‍शुई उपायों को अपनाकर भी स्वस्थ रह सकते हैं। बस,आपको निम्न बातों का ध्यान रखने की आवश्यकता हैः-     हमेशा अपनी निजी शुभ दिशा की ओर सिर करके शयन करें। अपनी निजी शुभ दिशा आप कुआ नंबर के माध्यम से जान सकते हैं। फेंग्‍शुई के एक अन्य अध्याय में इसका विस्तृत वर्णन किया गया है।      कक्ष में अगर शीशा लगा है तो शयन के दौरान सिर शीशों की ओर नहीं होना चाहिए। शीशा  अग्नि तत्व का प्रतिरोधक है। अग्नि तत्व के प्रभाव को कम कर देता है, जिसका सीधा असर स्वास्थ्य पर पड ता है। शयन कक्ष से जल तत्व को भी दूर रखें। कोशिश करें कि पानी से संबंधित कोई पेंटिग या टेलीविजन भी शयन कक्ष में न हो।      शौचालय अथवा जहां वाशिंग मशीन रखी हो, शयन के दौरान उस तरफ सिर न करें।      छत में लगे लोहे के बीम के नीचे शयन न करें। यह सिरदर्द और चिडचिडेपन का कारण बन सकता है। यही नहीं, इससे आपसी संबंधों में भी तनाव उत्पन्न होता है।     जिस कक्ष का दरवाजा सीढियों के सामने खुलता हो, उसमें द्गायन नहीं करना चाहिए। ऐसे कमरे में शयन करने से भी बचें,  जो लंबे गलियारे के अंत में स्थित हो। इससे उत्पन्न होने वाली नकारात्मक ऊर्जा बीमारियों का कारण बनता है।      घर में कोई नुकीली वस्तु इस प्रकार न लगी हो, जिसका मुख किसी भी अवस्था में परिवार के सदस्यों की ओर रहता हो। ऐसी नुकीली चीजें आपके स्वास्थ्य के लिए जहरीले पदार्थ का कार्य करते हैं।      पूर्व दिशा स्वास्थ्य और लम्बी आयु का प्रतिनिधित्व करती है। इसलिए अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो इस दिशा को ऊर्जावान रखें।      घर में सकारात्मक ऊर्जा को […]

बच्चों के साथ संबंधों को बनाएं मधुर

बच्चे भगवान का रूप होते हैं। परिवार बच्चों के बिना अपूर्ण होता है। बच्चे पाने और उनकी खुशी के लिए माता-पिता क्या-क्या नहीं करते। ईश्वर से दुआएं करते हैं, तीर्थयात्रा करते हैं,उनकी छोटी से छोटी खुशी के लिए बड़े से बडा त्याग करने को भी तत्पर रहते हैं। जहां बच्चे संस्कारी व माता-पिता के आज्ञाकारी हों, उस परिवार को खुशहाल परिवार माना जाता है। लेकिन ऐसे दुर्भागी परिवार भी होते हैं, जहां संतान माता-पिता के कहे में नहीं होती। ऐसी स्थिति से बचने में फेंग्‍शुई आपकी मदद कर सकता है। जरूरत है निम्न बातों पर ध्यान देने कीः-      बच्चों के साथ संबंध मधुर रखने के लिए माता-पिता को अपनी निजी शुभ दिशा की ओर मुख करके शयन करना चाहिए।      आपके भवन के मुखय द्वार के सामने नकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाली कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। अगर ऐसा है तो इसका निदान फेंग्‍शुई गैजेट के माध्यम से तुरंत करना चाहिए।   पश्चिमी दिशा बच्चों से संबंधित दिशा है। यह दिशा सूक्ष्म धातु की भी होती है। पृथ्वी तत्व धातु का निर्माण करता है, जबकि अग्नि तत्व धातु को नष्ट कर देता है। पश्चिम दिशा में पृथ्वी और धातु तत्व को मजबूत बनाने का उपाय करें, जबकि इस दिशा से अग्नि तत्व व जल स्रोत को दूर रखना चाहिए। पश्चिम दिशा में धातु तत्व बढाने के लिए इस दिशा की दीवारों पर सुनहरा, सिल्वर या सफेद रंग का इस्तेमाल करें।      कई बार ऐसा भी देखने में आता है कि भवन का पश्चिमी कोना कटा हुआ होता है। ऐसी स्थिति में पश्चिमी दिशा की दीवार पर शीशा लगाना चाहिए अथवा इस दिशा में अधिक प्रकाशवान रखना चाहिए।      घर के दक्षिण-पूर्व हिस्से में गोल्डन, सिल्वर या सफेद रंग का इस्तेमाल करें।      सोते समय आपका व बच्चों का सिर शौचालय की तरफ नहीं होना चाहिए। शौचालय की तरफ सिर करके सोना दुर्भाग्य को आमंत्रित करता है। वहीं इससे बच्चों का ध्यान पढाई से हट जाता है।

फेंग्‍शुई दिलाए नाम और प्रसिद्धी

कहते हैं कि एक अच्छा दिन कुत्ते की जिंदगी में भी आता है। वहीं कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि वे नाम और प्रसिद्धि पाने के लिए ही बने हैं। इसमें संशय नहीं कि हमारी व्यक्तिगत छवि हमारे करियर को ऊंचाइयों पर ले जाने और हमारे व्यवसाय को सफलता दिलाने में सहायक होती है। पर कहते हैं न कि हमारा भाग्य हमेशा हमारा साथ नहीं देता। भाग्य ने पलटी मारी नहीं कि नाम और शौहरत को धूल में मिलते देर नहीं लगती। स्केंडल, मुकदमें, आरोप और कभी अफवाह भी हमारी छवि धूल-धुसरित कर देती है। ऐसे दुर्भाग्य का सामना हमें न करना पड़े, इसके लिए निम्नलिखित फेंग्‍शुई निर्देश का पालन करें:-     अपने कुआ नंबर को जानकर उसके अनुसार अपनी निजी सर्वोत्तम दिशा जानें और उसी दिशा  की ओर मुख करके शयन करें। (कुआ नंबर के माध्यम से अपनी निजी शुभ दिशा जानने की विधि आप फेंग्‍शुई विषय के तहत दूसरे लेख में देख सकते हैं।     अगर आपका कार्य जन संपर्क से जुडा हो तो अपने घर को इस तरह व्यवस्थित करें कि उसका मुख आपकी निजी शुभ दिशा की ओर हो।      अगर आपके भवन के सामने कोई ऊंची इमारत स्थित हो या इमारत का कोना आपके प्रवेश द्वार के सामने आता हो, तो प्रवेश द्वार पर पा-कुआ लटकाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम हो जाएगा।      फेंग्‍शुई के अनुसार दक्षिण दिशा नाम और प्रसिद्धि की दिशा है। इस दिशा को अग्नि तत्व की दिशा माना जाता है। अपेक्षित लाभ पाने के लिए दक्षिण दिशा की दीवार पर हल्का-चमकदार लाल रंग करवाएं।      भवन में दक्षिण दिशा में लकडी का फर्नीचर रख सकते हैं या फिर लाल रंग की कोई तस्वीर लगा सकते हैं। लेकिन इस दिशा में पानी या पानी का कोई उपकरण अथवा तस्वीर नहीं रखने चाहिएं। इस दिशा में पानी की उपस्थिति अग्नि तत्व के प्रभाव को कम कर देती है।