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दीर्घायु एवं आरोग्य भी देता है लाफिंग बुद्धा

आज फिर हम फेंग्‍शुर्इ के सबसे लोकप्रिय गैजेट यानी लाफिंग बुद्धा की चर्चा करने जा रहे हैं। आप में से ज्यादातर लोगों ने लाफिंग बुद्धा को लेकर जिज्ञासाएं प्रगट की हैं। तो आइए, जानते हैं फेंग्षुर्इ के इस चमत्कारी गैजेट के बारे में कुछ अनजाने पहलू। बुद्धा के हसंते हुए चेहरे को खुषहाली का खुला द्वार समझा जाता है। संपतित के इस देवता की पूजा-आराधना नहीं की जाती। घर में इनकी स्थापना से ही घर-परिवार में धन-दौलत का आगमन निषिचत माना जाता है।

फेंग्‍शुई पौधों से पाएं स्‍वास्‍थ्‍य व समृद्धि

बागवानी का शौक भला किसे नहीं होता। खासकर महानगरों में जहां हरियाली जीवन से लुप्‍त होती जा रही है, बागवानी का शौक हमें प्रकृति से जोडे रखता है। पौधे शौक के लिए लगाए जाएं, ठीक है। लेकिन अगर अपने इस शौक को पूरा करने में आप फेंग्‍शुई नियमों का भी खयाल रखें तो तो प्रकृति से निकटता के साथ-साथ स्‍वास्‍थ्‍य, स्‍मृद्धि और दीर्घायु भी पा सकते हैं। फेंग्‍शुई में प्रत्येक पौधा किसी न किसी तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। लकड़ी वाले पौधे परिवर्तन और गतिशीलता के प्रतीक हैं,  तो सूरजमुखी और चमेली के फूलों के पौधे सुंदरता के परिचायक होते हैं। बगीचे को संतुलित बनाए रखने के लिए हमें पौधों का चयन उनकी प्रकृति और विशेषता के आधार पर करना चाहिए। पौधों से जुडा एक दिलचस्प पहलू यह है कि पौधे फेंग्‍शुई -उपचार का कार्य करते हैं यानी इनके माध्यम से हम जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। आइए, जानते हैं कि किस प्रजाति के पौधे से हमें क्या लाभ होता है। पौधा/वृक्ष                                                           विशेषता बबूल                                                                   स्थायित्व एप्रीकोट खुबानी                                                   अपेक्षित परिणाम बिगोनिया                                                           फेंग्‍शुई की नर व मादा एनर्जी यानी यिन व यांग के बीच उचित                                                          संतुलन चैरी                                       […]

फेंग्‍शुई से डेकोरेट हो ड्राइंगरूम

ड्राइंगरूम जिसे लिविंगरूम और बैठक भी कहा जाता है, घर का सबसे खास हिस्सा होता है। ड्राइंगरूम घर का एकमात्र स्थान है, जहां परिवार के सभी सदस्य एकसाथ समय बीताते हैं। यहीं पर बैठकर कभी हम मनोरंजन करते हैं, तो कभी भोजन करते हैं और कभी अपने सुख-दुख बांटते हैं और भविद्गय की योजनाओं का खाका खींचते हैं। फेंग्‍शुई कहता है कि ड्रांइगरूम रिश्तों में मीठास कायम रखने और करियर को उज्ज्वल बनाने में विद्गोद्गा भूमिका का निर्वाह करता है। आवश्यक है कि आपका ड्राइंगरूम संतुलित, शांत और ऊर्जावान हो। फेंग्‍शुई के अनुरूप अपने ड्राइंगरूम को इस प्रकार सुस्सजित करें कि पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे। फेंग्‍शुई कहता है कि उन्नति के सभी अवसर मुखय द्वार से आते हैं। इसलिए अपने ड्राइंगरूम का प्रवेश द्वार भवन के प्रवेश द्वार की दिशा में रखें। ड्राइंगरूम में रोशनी का पर्याप्त प्रबंध होना चाहिए, क्योंकि प्रकाश खुशियों व सौभाग्य का प्रतीक है। वहीं ड्राइंगरूम में मद्धिम रोशनी निरसता की परिचायक है। ड्राइंगरूम में सोफा, काउच, कुर्सियां कक्ष के प्रवेश द्वार की दिशा में रखनी चाहिएं। बैठने की व्यवस्था इस प्रकार होनी चाहिए कि ड्राइंगरूम में बैठे व्यक्तियों का मुख प्रवेश द्वार की तरफ हो। पेंटिंग्स, पौधों और फूलों आदी से आप अपने कक्ष को सजा सकते हैं। कमरे की पूर्वी दीवार पर परिवार के सदस्यों की फोटो लगाएं या पेड़ की बडी तस्वीर। यह घर में खुशियां लेकर आता है। उत्तर दिशा की दीवार पर पानी से भरी झील या झरने की तस्वीर लगाने से करियर में आशातीत सफलता हांसिल होती है। इसके साथ ही कक्ष को ऊर्जावान बनाने के लिए मिट्‌टी से बने शो-पीस इत्यादी भी सजावट के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। ड्राइंग रूम में सीधे व कांटों वाले पौधे न लगाएं। अगर आपके कमरे की दीवार की चौड़ाई अधिक है तो आप उक्त दीवार पर शीशा लगा सकते हैं। बेहतर होगा कि शीशा फेंग्‍शुई विशेषज्ञ के निर्देशन में लगाएं, क्योंकि गलत दिशा या गलत तरीके से लगाया शीशा विपरीत परिणाम दे सकता है। आपका ड्राइंगरूम अव्यवस्थित न हो। उसे खूबसूरत बनाने के लिए आप आकषर्क तस्वीरों व शो-पीस आदी इस्तेमाल कर सकते हैं। गोल पत्तों के पौधों वाले गमले भी ड्राइंगरूम में लगाकर आप उसे आकर्शक […]

प्रवेश द्वार को बनाएं खास

घर का मुखय द्वार, जिसे प्रवेश द्वार भी कहा जाता है, उसी प्रकार महत्व रखता है, जिस प्रकार शरीर में हमारा मुख। प्रवेश द्वार न सिर्फ घर के अंदरुनी द्वारों से जुड़ा होता है, यहीं से परिवार के सदस्य और मेहमान व आगंतुक प्रवेश करते हैं। हमारे रहन-सहन, हमारी जीवनशैली के बारे में आगंतुकों को बहुत कुछ अंदाजा प्रवेश द्वार से हो जाता है। प्रवेश द्वार परिवार के सदस्यों व मेहमानों का स्वागत करने वाला हो। प्रवेश द्वार से ही घर में ऊर्जा का संचार होता है। घर मे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हो या नकारात्मक ऊर्जा का यह निर्भर करता है प्रवेश द्वार की स्थिति पर। फेंग्‍शुई के नियमों का अनुपालन करके बनाया गया प्रवेश द्वार परिवार को समृद्धि, स्वास्थ्य और लंबी आयु प्रदान करता है। प्रवेश द्वार के निर्माण के समय आपको कुछ विशेष बातों को ध्यान में रखने की आवश्यकता है। प्रवेश द्वार किस दिशा में है, यह जानना अति-आवश्यक है। उदाहरण के तौर पर अगर आपके भवन का प्रवेश द्वार दक्षिण दिशा की ओर है, तो आप द्वार पर दक्षिण दिशा के फेंग्‍शुई तत्व का प्रतिनिधित्व करने वाला रंग ही करवाएं। विदित है कि फेंग्‍शुई के पांच मूल तत्व हैं- अग्नि, पृथ्वी, जल, धातु एवं लकडी। इनमें से प्रत्येक तत्व किसी न किसी दिशा विशेष से जुडा है और प्रत्येक तत्व का प्रतिनिधि रंग भी होता है। प्रेवश द्वार की लंबाई-चौडाई संतुलित होनी चाहिए। न यह बहुत लंबा हो और न छोटा। बहुत छोटा प्रवेश द्वार जहां परिवार में वैमन्सय व तनाव उत्पन्न करता है, वहीं बहुत लंबा प्रवेश द्वार आर्थिक परेशानियों का कारण बनता है। दरवाजे की चोखट किसी भी भवन के लिए विशेष महत्व रखती है। चौखट सदैव मजबूत होनी चाहिए। मजबूत चौखट परिवार के लिए सौभाग्य लाती है। ध्यान रहे कि सौंदर्य को फेंग्‍शुई में सकारात्मक ऊर्जा का वाहक माना गया है। इसलिए प्रवेश द्वार की खूबसूरती को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। प्रवेश द्वार के दरवाजे पर आप लाल, नारंगी, बैंगनी या गहरा गुलाबी रंग कर सकते हैं। ये रंग अग्नि तत्व के प्रतिनिधि रंग हैं। वहीं आप हरा व भूरा रंग भी कर सकते हैं, जो कि लकड़ी तत्व के प्रतिनिधि रंग है। बताने की आवश्यकता नहीं कि लकडी अग्नि का सहयोगी तत्व है। लकडी […]

बाथरूम भी हो फेंग्‍शुई सम्मत

भले ही बाथरूम में हम अधिक समय व्यतीत न करते हों, लेकिन यह हमारे निजी इस्तेमाल का बेहद खास स्थान होता है। जीवन में सकारात्मक परिणामों के लिए आवश्यक है कि हमारे स्नानघर की दिशा व दशा उचित हो। फेंग्‍शुई बाथरूम को विद्गोद्गा अहमियत प्रदान करता है, क्योंकि यहां हम अपने शारीरिक विकारों के साथ-साथ हम अपने भावनात्मक विकारों (मैल) की भी सफाई करते हैं। फेंग्‍शुई के अनुसार, बाथरूम घर में उत्तर दिद्गाा में स्थित होना चाहिए। बाथरूम को घर के मध्य भाग में न बनाएं। इससे परिवार के सदस्यों को शारीरिक परेशानियों, बीमारी आदी से गुजरना पड़ सकता है। बाथरूम घर के मुखय द्वार से दिखाई न दे। इसे बेडरूम व रसोईघर के सामने भी बनाने से बचना चाहिए। बाथरूम व रसोई अथवा बेडरूम की दीवार से न जुडा हो। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। बाथरूम का प्रतिनिधि तत्व जल है। बाथरूम की दीवारों पर हमेशा पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करने वाले भूरा या पीला रंग करवाने चाहिएं। जिस प्रकार पृथ्वी जल को सोख लेती है, उसी प्रकार ये रंग भी बाथरूम में अतिरिक्त जल को सोखकर वहां ऊर्जा का प्रवाह संतुलित करते हैं।  बाथरूम में खिड की दरवाजे के ठीक सामने न बनी हो। बाथटब, शौचालय के पॉट में भी कुछ दूरी होनी चाहिए। इसके साथ ही बाथरूम में हवा व रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था हो। फेंग्‍शुई कहता है कि बाथरूम की दीवार पर शीशे लगाने से घर में ‘ची‘ यानी ऊर्जा का प्रवाह होता है, लेकिन ध्यान रहे कि शीशे एक-दूसरे के सामने न लगे हों। बाथरूम अगर घर के मुखय प्रवेश द्वार के सामने बना हो तो करियर के अवसर प्राप्त होने से पहले ही छिन जाते हैं। बाथरूम अगर घर के मध्य भाग में बना हो, तो उसके बाहरी हिस्से की दीवार पर शीशा लगाएं व बाथरूम की दीवार पर लाल रंग करवाएं। इसके साथ ही पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करने वाला सामान जैसे मिट्‌टी का गमला, क्रिस्टल अथवा स्टोन बाथरूम के कोनों में रखें। बाथरूम में अगर खिड़की न बनी हो, तो वहां ताजगी व वायु तत्व के लिए आप छोटे पौधे का गमला रख सकते हैं। गमले को सौर प्रकाश व ताजा हवा देने के लिए आप उसे नियमित समय के […]

ऐसा हो आपका फेंग्‍शुई बेडरूम

घर महज सिर छुपाने की जगह नहीं, हर आम-ओ-खास आदमी का सपना होता है। घर के चयन से लेकर उसमें प्रवेश करने तक हम न जाने क्या-क्या विधान और पूजा-पाठ करते हैं। यह सब इसलिए ताकि हमारा घर हमारे लिए आदर्द्गा आवास बन जाए, जहां खुशियां और समृद्धि का हर पल वास हो। फेंग्‍शुई कहता है कि घर के चयन में आपको तीन बातों का विशेष खयाल रखना चाहिए। पहली- घर की दिशा व लोकेशन। दूसरी, घर में रसोईघर का स्थान और तीसरी है- बेडरूम। बेडरूम अर्थात शयन कक्ष हमारे घर का ही नहीं, जीवन का भी अहम्‌ स्थान होता है। यही वह स्थान होता है, जहां हम प्रतिदिन की थकान उतारते हैं और गहरी आरामदायक निद्रा के बाद नयी सुबह में नए जीवन के लिए तैयार होते हैं। बेडरूम में ही हम अपने जीवनसाथी के साथ अंतरंग व यादगार लम्हे बिताते हैं। इतना ही नहीं, शयन कक्ष में ही हम अपने दिनभर के अच्छे-बुरे कार्यों पर चिन्तन-मनन भी करते हैं। अपनी गलतियों के लिए पद्गचाताप्‌ करते हैं, तो सकारात्मक कार्यों से स्वयं को नयी सफलता के लिए स्वप्रेरित करते हैं। ह्ण     फेंग्‍शुई कहता है कि हमारा शयन कक्ष अगर उपयुक्त है तो वह हमें सोते समय भी सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है, जबकि हमारे नकारात्मक विचारों का शमन करता है। हमेशा अपनी निजी शुभ दिशा की ओर सिर करके शयन करें। अपनी निजी शुभ दिशा आप कुआ नंबर के माध्यम से जान सकते हैं। फेंग्‍शुई के एक अन्य अध्याय में इसका विस्तृत वर्णन किया गया है। ह्ण     कक्ष में अगर शीशा लगा है तो शयन के दौरान सिर शीशों की ओर नहीं होना चाहिए। शीशा अग्नि तत्व का प्रतिरोधक है। अग्नि तत्व के प्रभाव को कम कर देता है, जिसका सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ता है। शयन कक्ष से जल तत्व को भी दूर रखें। कोशिश करें कि पानी से संबंधित कोई पेंटिग या टेलीविजन भी शयन कक्ष में न हो। ह्ण     शौचालय अथवा जहां वाशिंग मशीन रखी हो, शयन के दौरान उस तरफ सिर न करें। ऐसा करने से बेचैनी व तनाव रहता है। ह्ण     छत में लगे लोहे के बीम के नीचे शयन न करें। यह सिरदर्द और चिड़चिडेपन का कारण बन सकता है। यही नहीं, इससे आपसी संबंधों में भी तनाव […]

फेंग्‍शुई से बनाएं अपना रसोईघर

रसोईघर किसी भी घर का महत्वपूर्ण स्थान होता है। यही वह जगह होती है, जहां गृहणी अपना अधिकांश समय व्यतीत करती है और अपने परिवार के लिए प्यार भरा पौष्टिक भोजन बनाती है। फेंग्‍शुई के अनुसार, दक्षिण व पूर्व दिशा रसोईघर के लिए सर्वोचित होती हैं। ये दोनों दिशाएं क्रमश:  प्रकाश व वायु का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन दिशाओं का तत्व लकड़ी है, जो कि अग्नि का सहयोगी तत्व माना जाता है। इसमें संशय नहीं कि रसोईघर में भोजन बिना अग्नि प्रज्ज्वलित किए नहीं बनाया जा सकता। लकडी तत्व इस कार्य में सहायक भूमिका का निर्वाह करता है। रसोईघर अगर भवन के मध्य भाग में बनाया जाता है, तो वह गृहस्वामी के लिए विभिन्न समस्याओं का सबब बन जाता है। परिवार के अन्य सदस्यों को भी निराशा और मोटापे जैसे बीमारियों का शिकार होते देखा जा सकता है। रसोईघर भवन के प्रवेश द्वार के सामने नहीं होना चाहिए। फेंग्‍शुई कहता है कि रसोईघर की दीवारों का रंग सफेद होना चाहिए। सफेद रंग स्वच्छता व पवित्रता का प्रतीक है। धातु तत्व का प्रतीक है सफेद रंग, जो रसोईघर में अग्नि तत्व की मजबूत स्थिति के सहयोगी का कार्य करता है। रसोईघर की दीवारों पर कभी भी लाल रंग जो कि अग्नि तत्व का प्रतीक है या काला/गहरा नीला रंग, जो जल तत्व के प्रतीक हैं,  नहीं करने चाहिएं। न ही रसोईघर की दीवारों पर हरा रंग इस्तेमाल करें, जो कि लकडी तत्व का प्रतीक है। रसोईघर के लिए सबसे उपयुक्त रंग हल्का पीला अथवा क्रीम है। यह रंग पाचन शक्ति को बेहतर रखता है। रसोईघर कभी भी सीढि यों के नीचे न बनाएं। घर के इस खास हिस्से को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए क्राइसोप्रस क्रिस्टल लगाए जा सकते हैं। चूंकि रसोईघर खाना बनाने से लेकर खाना खाने, साफ-सफाई करने और कभी-कभी गृहणी के लिए सुस्ताने का स्थान भी होता है, लिहाजा इसके लिए सही स्थान का चयन करना वाकई कठिन कार्य है। लेकिन फेंग्‍शुई उपायों को अपनाकर इस कठिन कार्य को आसान किया जा सकता है। जानिए फेंग्‍शुई रसोईघर के लिए कुछ खास बातें :- ह्ण     रसोईघर में हवा व प्रकाश के उचित प्रबंध के लिए वेंटिलेशन की व्यवस्था हो। ह्ण     खाना बनाने के लिए चूल्हा, बर्तन साफ करने का सिंक और रेफ्रिजरेटर रसोईघर […]

शिक्षा के लिए भी है लाभकारी फेंग्‍शुई

शिक्षा जीवन के सुखद सपनों का आधार है। हमारी शिक्षा ही हमारे करियर की दिशा निर्धारित करती है, जिस पर हमारे जीवन की तमाम खुद्गिायां निर्भर करती हैं। यह सच है कि फेंग्‍शुई या ऐसी कोई भी विद्या आलसी छात्रों की मदद नहीं कर सकती, लेकिन औसत, मगर मेहनती छात्रों को जरूर वांछित परिणाम प्राप्त करा सकती है। आप भी अगर अपने शैक्षणिक जीवन में असाधारण सफलता अर्जित करना चाहते हैं, तो फेंग्‍शुई के निम्न उपायों को अपनाएं:-     कुआ नंबर की सहायता से अपनी ४ निजी शुभ दिशाओं को जानिए। निजी शुभ दिशाएं आपके करियर, शयन की स्थिति, आपसी संबंधों और आर्थिक सफलता से संबंध रखती हैं। व्यक्तिगत शुभ दिशा जानने की विधि वेबसाइट के दूसरे लेख में दी गयी है।      घर में जो बच्चे शिक्षा कर रहे हैं, उनके लिए व्यक्तिगत शुभ दिशा जानकर,  जो दिशा शिक्षा के लिए सर्वोत्म हो उनकी स्टडी टेबल उसी दिशा में रखें, जिससे पढ़ाई करने के दौरान उनका मुख उस दिशा की ओर है। यही नहीं, उन्हें शयन के दौरान सिर भी इसी दिशा में रखना चाहिए।     स्टडी टेबल की तरफ किसी नुकीली वस्तु का मुख नहीं होना चाहिए। यह न सिर्फ असहजता और शारीरिक परेशानी का कारण बनता है, पढाई में एकाग्रता को भी भंग करता है।      बच्चों का द्गायन या अध्ययन कक्ष गैराज के ऊपर न बनाएं। अध्ययन कक्ष रसोइघर व शौचालय के ऊपर या नीचे भी नहीं बनाना चाहिए।      उत्तर-पूर्व दिशा शिक्षा अर्थात ज्ञान की दिशा है। इस दिशा को अधिक ऊर्जावान बनाने के लिए पृथ्वी तत्व से संबंधित वस्तुएं जैसे मिट्‌टी के बने शो- पीस आदी दीवार पर लगाएं।      मेहनत और धैर्य कभी व्यर्थ नहीं जाते। अगर आप लगन व मेहनत से अध्ययन करते हैं, तो उसका अपेक्षित परिणाम आपको अवश्‍य मिलेगा।

करियर संवारे फेंग्‍शुई सेट

फेंग्‍शुई नियमों को अपनाकर आप न सिर्फ स्वस्थ रह सकते हैं और आपसी संबंधों को मधुर बना सकते है, बल्कि अपने करियर में सफलता भी प्राप्त कर सकते हैं।      कुआ नंबर की सहायता से अपनी ४ निजी शुभ दिशाओं को जानिए। निजी शुभ दिशाएं आपके करियर, शयन की स्थिति,  आपसी संबंधों और आर्थिक सफलता से संबंध रखती हैं। व्यक्तिगत शुभ दिशा जानने की विधि वेबसाइट के दूसरे लेख में दी गयी है।      अगर आपको लगता है कि आप करियर में सफलता नहीं पा रहे हैं या अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है, तो घर के मुखय द्वार को अपने करियर के लिए व्यक्तिगत शुभ दिशा की ओर स्थानांतरित कर दें।     अगर कार्यालय (ऑफिस) के स्वामी आप स्वयं हैं तो अपनी टेबल केबिन के दरवाजे के ठीक सामने न लगाएं।      इस बात का विशेष खयाल रखें कि आपकी ऑफिस चेयर के पीछे खिड़की-दरवाजा इत्यादि न होकर दीवार हो। कुर्सी के पीछे अस्थायी आधार जैसे खिड की या दरवाजा होने का तात्पर्य है आपके कार्यक्षेत्र मे सहयोग का अभाव। यही नहीं, आपके कर्मचारी या सहकर्मी आपके साथ धोखा कर सकते हैं।      अपनी कुर्सी के पीछे दीवार पर पर्वत श्रंखलाओं वाली पेंटिंग लगाएं। लेकिन इस बात का खयाल रखें कि पेंटिंग में जल तत्व यानी पानी का दृष्य न हो।      अगर आपके कार्यस्थल में स्तंभ (पिल्लर) बने हैं, तो नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह कम करने के लिए आप स्तंभों के साथ पौधों के गमले रख सकते हैं। इस दोष का उपाय क्रिस्टल लगाकर एवं उक्त क्षेत्र को अधिक प्रकाशमान करने से भी किया जा सकता है।      फेंग्‍शुई के अनुसार, उत्तर दिशा करियर की दिशा है। इस दिशा का तत्व जल है एवं रंग नीला है। करियर में बेहतर परिणाम पाने के लिए घर या कार्यस्थल पर उत्तर दिशा में मेटल विंड चाइम (धातु की पवन घंटियां) लगाएं।

बच्चों के साथ संबंधों को बनाएं मधुर

बच्चे भगवान का रूप होते हैं। परिवार बच्चों के बिना अपूर्ण होता है। बच्चे पाने और उनकी खुशी के लिए माता-पिता क्या-क्या नहीं करते। ईश्वर से दुआएं करते हैं, तीर्थयात्रा करते हैं,उनकी छोटी से छोटी खुशी के लिए बड़े से बडा त्याग करने को भी तत्पर रहते हैं। जहां बच्चे संस्कारी व माता-पिता के आज्ञाकारी हों, उस परिवार को खुशहाल परिवार माना जाता है। लेकिन ऐसे दुर्भागी परिवार भी होते हैं, जहां संतान माता-पिता के कहे में नहीं होती। ऐसी स्थिति से बचने में फेंग्‍शुई आपकी मदद कर सकता है। जरूरत है निम्न बातों पर ध्यान देने कीः-      बच्चों के साथ संबंध मधुर रखने के लिए माता-पिता को अपनी निजी शुभ दिशा की ओर मुख करके शयन करना चाहिए।      आपके भवन के मुखय द्वार के सामने नकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाली कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। अगर ऐसा है तो इसका निदान फेंग्‍शुई गैजेट के माध्यम से तुरंत करना चाहिए।   पश्चिमी दिशा बच्चों से संबंधित दिशा है। यह दिशा सूक्ष्म धातु की भी होती है। पृथ्वी तत्व धातु का निर्माण करता है, जबकि अग्नि तत्व धातु को नष्ट कर देता है। पश्चिम दिशा में पृथ्वी और धातु तत्व को मजबूत बनाने का उपाय करें, जबकि इस दिशा से अग्नि तत्व व जल स्रोत को दूर रखना चाहिए। पश्चिम दिशा में धातु तत्व बढाने के लिए इस दिशा की दीवारों पर सुनहरा, सिल्वर या सफेद रंग का इस्तेमाल करें।      कई बार ऐसा भी देखने में आता है कि भवन का पश्चिमी कोना कटा हुआ होता है। ऐसी स्थिति में पश्चिमी दिशा की दीवार पर शीशा लगाना चाहिए अथवा इस दिशा में अधिक प्रकाशवान रखना चाहिए।      घर के दक्षिण-पूर्व हिस्से में गोल्डन, सिल्वर या सफेद रंग का इस्तेमाल करें।      सोते समय आपका व बच्चों का सिर शौचालय की तरफ नहीं होना चाहिए। शौचालय की तरफ सिर करके सोना दुर्भाग्य को आमंत्रित करता है। वहीं इससे बच्चों का ध्यान पढाई से हट जाता है।